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अयोध्या मामले पर शनिवार को ही क्यों सुनाया गया फैसला?

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अपना फैसला सुनाया। हालांकि कयास लगाए जा रहे थे कि फैसला 14-15 नवंबर को सुनाया जाएगा।

दशकों पुरानी और देश की सर्वाधिक विवादित व चर्चित केस में देश की सर्वोच्च अदालत ने शनिवार को ‘सुप्रीम’ फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट शनिवार की सुबह 10:30 बजे अयोध्या मामले पर फैसला सुनाना शुरू किया। फैसले से पहले देशभर के लोगों की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिक गई थी और सभी के मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे कि आखिर क्या फैसला होगा?

हालांकि दोनों पक्षों की ओर से अभी तक यही बात कही जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा वह सर्वमान्य और अंतिम होगा। इन सबके बीच एक और भी सवाल उठ रहा है कि आखिर शनिवार के दिन ही सुप्रीम कोर्ट क्यों फैसला सुनाया गया, जबकि आम तौर पर किसी भी केस में फैसला सोमवार से शुक्रवार के बीच में सुनाया जाता है। लेकिन यह जरूर कयास लगाए जा रहे थे कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के सेवानिवृत से पहले ही फैसला आ जाएगा।

17 नवंबर को सेवानिवृत होंगे चीफ जस्टिस

आपको बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं। सबसे बड़ी बात कि 17 नवंबर को रविवार है। ऐसे में रविवार का दिन अवकाश का दिन होता है। आम तौर पर कोई भी बड़ा फैसला चीफ जस्टिस के रिटायरमेंट के दिन या उससे एक दिन पहले नहीं सुनाया जा सकता है।

चूंकि 16 नवंबर को शनिवार है और अवकाश का दिन है।अब जस्टिस गोगोई के लिए अंतिम कार्यदिवस 15 नवंबर है। लिहाजा यह कयास लगाए जा रहे थे कि 14 या 15 नवंबर को फैसला आ सकता है।

हालांकि इसमें भी तकनीकी दिक्कतें थी। मसलन किसी केस में वादी या प्रतिवादी की ओर से फैसले से ठीक पहले कुछ तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर अपील की जाती है और उसमें एक-दो दिन का समय लग जाता है। यदि 14-15 को फैसले का दिन होता और किसी पक्ष की ओर से कोई अपील की जाती तो फैसला 16 या 17 तक के लिए टल जाता।

शुक्रवार की देर रात ऐलान

बता दें कि शुक्रवार की देर रात को इसलिए यह सूचना दी गई कि शनिवार सुबह 10:30 बजे अयोध्या मामले पर फैसला आएगा, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि कुछ शरारती तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश करेंगे।

ऐसें में प्रशासन और सरकार ने एहतियातन कुछ कदम उठाए और कोर्ट की ओर से यह संदेश प्रसारित किया गया कि अयोध्या पर शनिवार की सुबह फैसला सुनाया जाएगा। फैसला के मद्देनजर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। कई जगहों पर धारा 144 लागू कर दी गई है।

फैसला आने के ऐलान से पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगई ने उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी और पुलिस महानिदेशक ओ.पी.सिंह से मुलाकात की थी।