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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, रामलला को मिला विवादित जमीन, मुस्लिम पक्ष को मिलेगा 5 एकड़ जमीन

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए विवादित भूमि को राम जन्मभूमि न्यास को सौंप दिया है और मुस्लिमों को पांच एकड़ जमीन देने का फैसला किया है।

दशकों पुरानी अयोध्या मामले पर आखिरकार देश की सर्वोच्च अदालत ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तमाम पक्षों को सुनने के बाद विवादित जमीन को राम जन्म भूमि न्यास को सौंप दिया है। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने अपना एकाधिकार साबित नहीं कर पाया।

हालांकि कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन दी जाए। केंद्र सरकार और राज्य सरकार इस बात को सुनिश्चित करें और जमीन की व्यवस्था करें।

निर्मोही अखाड़ा और शिया पक्ष का दावा खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि निर्मोही अखाड़ा और शिया पक्षकार के दावा को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मीर बांकी ने बाबर के समय इस मस्जिद को बनाया था। इससे यह साबित नहीं होता है कि इसपर शिया पक्ष का अधिकार हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि अखाड़े का दावा लिमिटेशन से बाहर है।

तीन महीने में बने ट्रस्ट

कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर के निर्माण के लिए सरकार एक ट्रस्ट बनाए और काम शुरू करे। कोर्ट ने कहा कि यह ट्रस्ट तीन महीने के अंदर बने। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार ने मुस्लिम पक्ष (सुन्नी वफ्फ बोर्ड ) को अयोध्या में किसी भी जगह 5 एकड़ जमीन दें।

पांच जजों की बेंच ने सुनाया फैसला

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच यह ऐतिहासिक फैसला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ASI की रिपोर्ट के आधार पर यह भी कहा है कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। साथ ही कोर्ट ने ASI रिपोर्ट के आधार पर अपने फैसले में कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की भी पुख्ता जानकारी नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा साबित करने में नाकाम रहा है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने साफ कहा कि फैसला कानून के आधार पर ही दिया जाएगा। चीफ जस्टिस ने कहा कि 1949 में मूर्तियां रखी गईं थी।