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तो राष्ट्रपति शासन की तरफ बढ़ रहा है महाराष्ट्र!

विधायी परंपराओं के अनुरूप 9 नवंबर तक नई सरकार का गठन हो जाना चाहिए। लेकिन इसकी उम्मीद बहुत कम है।

नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम आने के 15 दिन बाद भी नई सरकार बनाने की गुत्थी सुलझी नहीं है। न ही शुक्रवार को इसके सुलझने की संभावना है। यह इस बात का संकेत है कि महाराष्ट्र राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है। ऐसा इसलिए कि विधायी परंपराओं के अनुरूप 9 नवंबर तक नई सरकार का गठन हो जाना चाहिए। लेकिन इसकी उम्मीद बहुत कम है।

दरअसल, महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और शिवसेना की बीच पेंच फंसने के चलते बीजेपी—शिवसेना गठबंधन को मिले जनादेश के 15 दिन बाद भी सरकार का गठन नहीं हो सका है। जैसे-जैसे महाराष्ट्र में सरकार के गठन की आखिरी तारीख यानि 9 नवंबर नजदीक आ रही है वैसे–वैसे सूबे में राष्ट्रपति शासन लगने की आंशका तेज होती जा रही है।

सात नवंबर को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के नव निर्वाचित विधायकों और समर्थक निर्दलीय विधायकों की बैठक बुलाई तो लगा कि कुछ सकारात्मक फ़ैसला आएगा परंतु बैठक के बाद जब सभी 56 और कुछ निर्दलीय विधायकों को एक पांच सितारा होटल भेजकर उनकी निगरानी का फ़ैसला हुआ तो साफ़ हो गया कि शिव सेना अपने उसी रुख़ पर क़ायम है जिसका संकेत उसने 24 अक्टूबर को दिया था। शिवसेना की मांग है कि इस बार महाराष्ट्र का सीएम कोई शिवसैनिक होगा।

दूसरी तरफ गुरुवार को बीजेपी महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के नेतृत्व में कुछ नेता राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की। लेकिन इस प्रतिनिधिमंडल में सीएम देवेंद्र फडणवीस  का शामिल न होना इस बात के संकेत हैं कि बीजेपी अभी तक बहुमत का जुगाड़ नहीं कर पाई है। इसलिए फडणवीस राज्यपाल से मिलने नहीं पहुंचे। अगर वो प्रतिनिधिमंडल में शामिल होते तो उन्हें राज्यपाल को बहुमत का आश्वासन देना पड़ता।

सरकार गठन के मामले में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने अपना रुख पहले बुधवार को ही साफ कर दिया था। उन्होंने कहा था कि सरकार गठन को लेकर एनसीपी और कांग्रेस की राय स्पष्ट है कि इस बार जनादेश बीजेपी और शिवसेना गठबंधन को मिला है। इसलिए सरकार बनाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है। हमें जनता ने विपक्ष की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी दी है जिसे पूरी गंभीरता के साथ निभाएंगे।

इस बीच बुधवार और गुरुवार को महाराष्ट्र में सियासी गतिविधि काफी दिलचस्प रहा। बुधवार को संजय राउत, शरद पवार, सुधीर मुनगंटीवार, रामदास अठावले नेताओं के के बयान सामने आए। लेकिन इससे समस्या का समाधान नहीं निकला। गुरुवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आरएसएस प्रमुख भागवत से मिले। आरएसएस प्रमुख से मुलाकात के बाद उन्होंने साफ कर दिया कि महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ही होंगे। इसके बाद संजय राउत ने साफ कर दिया कि शिवसेना सीएम पद से कम पर कोई समझौता नहीं करेगी। हालांकि बैकडोर से बीजेपी और शिवसेना के बीच सरकार के गठन को लेकर बातचीत जारी है।

लेकिन सरकार गठन को लेकर तय समय नौ नवंबर तक अगर कोई नई सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करता है तो केन्द्र सरकार और राज्यपाल के पास कोई चारा नहीं बचेगा और महाराष्ट्र राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ जाएगा, जो बहुत अफ़सोसजनक होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शिवसेना की ज़िद ने ही राज्य में यह हालात पैदा कर दिए हैं। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तरफ़ से इस कारण कोई पहल नहीं की जा रही है क्योंकि उन्हें लग रहा है कि शिव सेना प्रमुख ने जानबूझकर ये हालात पैदा किए हैं। यह केवल जनादेश का ही नहीं, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का अपमान करने के मक़सद से ही ड्पूरी पटकथा तैयार की गई है।