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नहीं सुधरे तो सीएम योगी ने कर दिया 7 PPS अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त

योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले दो वर्ष के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ जो कार्रवाई की है वह दूसरे प्रदेशों के लिए नजीर बनेगी।

 

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी भ्रष्टाचार में लिप्त और काम में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ बेहद सख्त फैसला लेने से नहीं चूकते। उन्होंने इसकी एक मिसाल गुरुवार को एक बार फिर पेश की। सीएम योगी ने 7 पीपीएस अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर भ्रष्टाचार में लिप्त अन्य अधिकारियों को साफ संकेत दे दिया है कि या तो सुधर जाएं या फिर नौकरी से हाथ धोने के लिए तैयार रहें।

यूपी सरकार ने 7 पुलिस उपाधीक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्त दी है। प्रदेश सरकार ने नई कार्रवाई के तहत सेनानायक 15वीं वाहिनी पीएसी आगरा के अरुण कुमार, फैजाबाद में डिप्टी एसपी विनोद कुमार राणा, आगरा में डिप्टी एसपी नरेंद्र सिंह राणा, सहायक सेनानायक 33वीं वाहिनी पीएसी झांसी तेजवीर सिंह यादव, डिप्टी एसपी मुरादाबाद संतोष कुमार सिंह तथा सहायक सेनानायक 30वीं वाहिनी पीएसी गोंडा में कार्यरत तनवीर अहमद खां को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। इन सभी की आयु 50 वर्ष या इससे अधिक है। इनके ऊपर कार्य में लापरवाही बरतने व भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप हैं।

सीएम योगी ने यह निर्णय स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार 7 पीपीएस अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त करने का निर्णय लिया। इतना ही नहीं अब हर विभाग में सुस्त और भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों व अधिकारियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

बता दें कि इससे पहले प्रदेश सरकार ने 16 नवंबर, 2017 को 50 साल से अधिक उम्र के 16 दागदार अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें जबरन रिटायर कर दिया था। इस मामले में एक वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले दो वर्ष के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ जो कार्रवाई की है वह दूसरे प्रदेशों के लिए नजीर बनेगी।

पिछले 2 वर्षो में योगी सरकार अलग-अलग विभागों के 200 से ज्यादा अफसरों और कर्मचारियों को जबरन रिटायर कर चुकी है।  योगी सरकार ने दो वर्षो में 400 से ज्यादा अफसरों, कर्मचारियों को निलंबन और डिमोशन जैसे दंड भी दिए हैं।