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अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला नहीं होगा अंतिम! ये होंगे अन्य विकल्प 

सुप्रीम कोर्ट शनिवार को दशकों पुराने देश के सबसे बड़े केस पर फैसला सुनाएगी। हलांकि यदि कोई पक्ष कोर्ट के इस फैसले से सहमत नहीं होता है तो उसके पास दो विकल्प होंगे।

देशभर के लोगों की निगाहें शनिवार को सुप्रीम कोर्ट पर टिकी होंगी। दशकों पुराने विवाद का मामले को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत फैसला सुनाने वाली है। इस फैसले को लेकर तमाम पक्षकार पहले से ही अपने-अपने जीत के दावे करते रहे हैं, लेकिन अब वह वक्त आ गया है और सुप्रीम कोर्ट 40 दिन की सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुनाने वाली है।

लिहाजा सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह से कोई चूक न हो इसलिए देशभर में सरकार ने एहतियातन सभी राज्यों में एडवाइजरी जारी कर दी है। पुलिस प्रशासन अलर्ट है। अयोध्या नगरी की बात करें तो उसे  छावनी में तब्दील कर दिया गया है।इन सबके बीच यह दोनों पक्षों की ओर से यह आवाज सुनाई दे रही है कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगा वह सर्वमान्य होगा। लेकिन क्या वाकई ऐसा है। यदी ऐसा है तो देश में अमन-शांति और भाईचारे के लिए सबसे अच्छा होगा।

यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर सुप्रीम कोर्ट के इस पांच सदस्यों की संवैधानिक बेंच के फैसले के अलावा क्या विकल्प हो सकता है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि भारत की परम्परा भाईचारे और सौहार्द की रही है।

दोनों पक्षों के पास होंगे दो विकल्प

इस फैसले के बाद दोनों पक्षों की ओर से दो विकल्प हो सकते हैं। यदि एक पक्ष कोर्ट के इस फैसले को नहीं मानता है तो वह रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) के लिए याचिका दायर कर सकता है। जबकि यदि इसपर भी वह संतुष्ट नहीं होता है तो वह क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल कर सकता है।

पुनर्विचार याचिका को लेकर कोर्ट (पुरानी बेंच) पर निर्भर करता है कि वह इसे स्वीकार करे या न करे। यदि स्वीकार कर भी ले तो इसे वही बेंच सुने जिसने फैसला सुनाया है या फिर नई बेंच, इसका फैसला भी कोर्ट ही करेगा। हालांकि कोर्ट के फैसले के अब तक के इतिहास में यह देखा गया है कि पुर्विचार याचिका पर पुरानी बेंच ही फैसला करती है।

क्यूरेटिव पिटीशन क्या है

आपको बता दें कि यदि किसी मूल फैसले को कोई पक्ष चैलेंज करता है यानी कि पुनर्विचार के लिए दाखिल करता है और उस फैसले पर भी पक्षकार संतुष्ट नहीं होता है तो वह उसके बाद वह क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करता है। यह कोर्ट के फैसले के खिलाफ अंतिम विकल्प होता है। इसके बाद जो भी निर्णय हो उसे मानना अनिवार्य और बाध्य होता है।

कोर्ट के इस अंतिम विकल्प को ही क्यूरेटिव पिटीशन (उपचार याचिका) कहा जाता है। बता दें कि क्यूरेटिव पिटीशन के अंतर्गत केवल कुछ बिन्दुओं या विषयों पर ही चर्चा की जाती है। हालांकि कोर्ट यदि चाहे तो क्यूरेटिव पिटीशन को स्वीकार कर सकता है या फिर खारिज भी कर सकता है।

40 दिनों तक चली सुनवाई

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में 5 सदस्यीय बेंच ने लगातार 40 दिनों तक सुनवाई की। इस बेंच में जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस एस अब्दुल नजीर भी शामिल रहे। मामले की सुनवाई 6 अगस्त से शुरू हुई थी।