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जानिए क्या है SPG, किसे मिलती है यह सुरक्षा?

एसपीजी में अलग-अलग फोर्स से जवानों को शामिल किया जाता है। एसपीजी सुरक्षा भारत में सबसे मजबूत सिक्यॉरिटी है।

नई दिल्ली। देश के कुछ गिने—चुने को वीवीआईपीज को सभी खतरों से बचाने के लिए तैयार अभेद्य चक्र का नाम एसपीजी है। इसका पूरा नाम स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप है। एसपीजी के जवानों की ट्रेनिंग लगातार बदलते दौर के हिसाब से चलती रहती है। अलग-अलग फोर्स से जवानों को इसमें शामिल किया जाता है। एसपीजी सुरक्षा भारत में सबसे मजबूत सिक्यॉरिटी है।

कब हुआ एसपीजी का गठन?
एसपीजी का गठन 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के बाद किया गया था। 1988 में पार्लियामेंट में एसपीजी ऐक्ट 1988 पास किया गया था। अब इस ऐक्ट के तहत पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार को कम से कम 10 साल तक एसपीजी सुरक्षा दी जानी थी।

एसपीजी प्रशिक्षित सुरक्षा इकाई है। यह आधुनिक उपकरणों और वाहनों से लैस होती है। इसमें 3,000 कमांडो होते हैं जिन्हें देश की सिक्यॉरिटी फोर्सेज से सिलेक्ट किया जाता है। अभी तक गांधी परिवार यानी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी और प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में ये 3000 जवान तत्पर रहते थे लेकिन अब अकेले पीएम मोदी की सुरक्षा का जिम्मा इन कमांडो के पास होगा।

क्यों है देश का सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा बल
जब भी कोई एसपीजी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति यात्रा करता है तो एसपीजी की छोटी-छोटी टीमें बनाई जाती हैं। एसपीजी उस स्थान की पूरी जांच जहां इस सुविधा को हासिल करने वाला व्यक्ति यात्रा करता है। एसपीजी के अधिकारी उस स्थान पर पहले ही पहुंच जाते हैं और 24 घंटे पहले ही उस स्थान को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं। एसपीजी की टीम में स्नाइपर्स और बम निरोधक विशेषज्ञ भी होते हैं।

एसपीजी की टीम के पास अत्याधुनिक उपकरण होते हैं। एसपीजी ऐक्ट के मुताबिक सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश एसपीजी की मदद करते हैं। एसपीजी कमांडो के पास आधुनिक रायफल्स, अंधेरे में देख पाने वाले चश्मे, संचार के अत्याधुनिक उपकरण, बुलेटप्रूफ जैकेट, दस्ताने, कोहनी और घुटनों पर लगाने वाले गार्ड्स होते हैं। इसके पास हाइटेक गाड़ियों का दस्ता भी होता है। एसपीजी के पास BMW7 सीरीज की बख्तरबंद गाड़ियां, रेंज रोवर्स, बीएमडब्ल्यू के एसयूवी, ट्योटा और टाटा की बख्तरबंद गाड़ियां होती हैं।

किसे मिलती है सुरक्षा
इस एक्ट का मकसद प्रधानमंत्री के सुरक्षा चक्र को मजबूत करना था। इसके साथ ही देश के चुनिंदा लोगों को अभेद्य सुरक्षा प्रदान करना था। एसपीजी सुरक्षा किसे मिले इस बात का निर्धारण सुरक्षा मूल्यांकन समिति करती है। यह गृह मंत्री के अधीन काम करती है। सुरक्षा मूल्यांकन समिति द्वारा नामित व्यक्ति को ही यह सुरक्षा मुहैया कराई जाती है।

एसपीजी एक्ट में संशोधन
सबसे पहले पूर्व पीएम वीपी सिंह के समय इस एक्ट में संशोधन किया गया। पूर्व पीएम राजीव गांधी से एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली गई थी। इस लाभ उठाकर आतंकी राजीव गांधी की हत्या करने में सफल हुए थे।

एसपीजी एक्ट में दूसरी बार संशोधन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी सरकार के वक्त की और पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव सहित एचडी देवगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल से एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली। 2003 में वाजपेयी सरकार ने एक बार फिर से एसपीजी ऐक्ट में संशोधन किया और 10 साल की सुरक्षा को कम करके एक साल कर दिया। यह एक साल प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद से गिना जाना था। इसमें यह भी कहा गया कि अगर किसी पूर्व प्रधानमंत्री की जान को खतरा है तो इसे एक साल से बढ़ाया भी जा सकता है।