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जानिए केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ कितना बदल गया जम्मू और कश्मीर?

31 अक्टूबर से जम्मू और कश्मीर भारतीय प्रांतों की सूची से बाहर कर केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा प्रदान किया गया है। अभी तक जम्मू और कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था।

नई दिल्ली। स्वतंत्र भारत में विलय के समय से जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात समाप्त हो गया। केंद्र सरकार ने संसद के दोनों सदन में संविधान संशोधन विधेयक 2019 पास कराकर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया। पहला जम्मू-कश्मीर और दूसरा लद्दाख। दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के नए उपराज्यपाल क्रमशः गिरीश चंद्र मुर्मू और आर के माथुर बनाए गए हैं।

5 अगस्त, 2019 को मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर उसेे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला लिया था। इस पर अमल के मकसद से गृह मंत्री अमित शाह की ओर से लोकसभा और राज्यसभा में पेश संविधान संशोधन विधेयक दो तिहाई बहुमत से पास हो गया था। इस बार यह ऐतिहासिक काम मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के 90 दिनों के भीतर ही पूरा कर दिया।

बता दें कि कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को भारत के साथ विलय संधि की थी, जिसके बाद यह रियासत भारत का अभिन्न हिस्सा बन गई।

आइए हम आपको बताते हैं कि जम्मू और कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के बाद उसके संविधानिक स्टेटस में कौन—कौन से 10 प्रमुख बदलाव आए।

1. ऐसा पहली बार हुआ है कि एक राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया। इसके साथ ही देश में राज्यों की संख्या 28 और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है।

2. जम्मू-कष्मीर पहली बार सीधे केंद्र के नियंत्रण में आ गया। राज्य का दर्जा छिनने की वजह से सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि यहां की आधिकारिक भाषा उर्दू की जगह हिंदी हो गई है। अभी तक जम्मू-कश्मीर देश का एकमात्र राज्य था जहां आधिकारिक भाषा उर्दू थी।

3. अब यहां आधार समेत 106 नए कानून पहली बार लागू होंगे। विशेष राज्य का दर्जा होने की वजह से यहां जम्मू-कष्मीर संविधान के जो 153 कानून विशेष रूप से लागू किए गए थे वोे अब अस्तित्व में नहीं रहे।

4. जे एंड के पुनर्गठन अधिनियम के सेक्शन 47 के मुताबिक नई विधानसभा का गठन होने के बाद नई सरकार किसी एक या इससे अधिक भाषाओं को प्रशासन के कामकाज की भाषा चुन सकेगी। ऐसी स्थिति में भी हिंदी के आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल करने का विकल्प बना रहेगा। विधानसभा में भी यही व्यवस्था लागू होगी। विधानसभा का कामकाज निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा तय की गई भाषा या हिंदी या अंग्रेजी में होगा।

5. मुस्लिम बहुल इस केंद्र शासित प्रदेश में मुस्लिमों को अल्पसंख्यक के रूप में दर्जा और अधिकार भी मिलेंगे। राज्य में दो नए रेडियो स्टेशन भी लॉन्च किए जाएंगे।

6. लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर पुड्डुचेरी के मंडल की तर्ज पर काम करेगा।

7. वर्तमान में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 107 सदस्य हैं। परिसीमन के बाद इनकी संख्या 114 तक पहुंच जाएगी। इनके अलावा लेफ्टिनेंट गवर्नर को विधानसभा में दो महिला सदस्य मनोनीत करने का अधिकार रहेगा। विधानसभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सीटों की संख्या भी उनकी आबादी के हिसाब से आरक्षित की जाएगी। सभी आयोग भंग कर दिए जाएंगे।

8. पहली बार 106 नए कानून लागू होंगे। इनमें आधार, मुस्लिम विवाह विच्छेद कानून, शत्रु संपत्ति कानून, मुस्लिम महिला सुरक्षा अधिनियम, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, आरटीआई, शिक्षा का अधिकार, व्हिसल ब्लोअर आदि शामिल हैं।

9. दोनों केंद्र षासित प्रदेषों मंे अरुणाचल, गोवा, मिजोरम यूनियन टेरेटरी काडर से अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्तियां की जाएंगी।

10. नया केंद्र शासित प्रदेश बनने के बावजूद यहां के जिन वाहनों को टोल टैक्स में छूट है, वह केंद्र के नए फैसले तक जारी रहेगा। परमिट भी नई व्यवस्था लागू होने तक वैध रहेंगे। लद्दाख के वाहनों को एलडीके की नंबर प्लेट मिलने की संभावना है।