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01 नवंबर को चितरंजन रेल कारखाने में बना था भारत का पहला भाप इंजन

ब्रिटिश हुकूमत के दौरान भारत में सबसे पहले स्टीम इंजन वाले रेलगाड़ी का परिचालन शुरू हुआ था। 1971 में तीव्र गति की रेल इंजन की मांग को देखते हुए चितरंजन रेल फैक्ट्री से इसका उत्पादन बंद कर दिया गया।

 

नई दिल्ली। भारत में अब बुलेट ट्रेन से लेकर ड्राइवरलेस ट्रेन तक की बातें होने लगी हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि 69 साल पहले यानि 1950 में आज ही के दिन चितरंजन रेल कारखाने में भारत का पहला भाप इंजन बनकर तैयार हुआ था। ये बात अलग है कि आजाद भारत में तीव्र गति की ट्रेनों की मांग को देखते हुए 1971 में चितरंजन रेल कारखाने में भाप इंजनों का निर्माण पूरी तरह बंद कर दिया गया। उसके बाद यहां पर डीजल इंजन बनाए जाने लगे।

भारतीय रेल में बदलाव का यह सिलसिला आज भी जारी है। पिछले कुछ समय से भारतीय रेल को उच्च तकनीक से लैस किए जाने से लेकर दो और खबरों के लिए लगातार चर्चा में बनी हुई है। पहली यह कि रेलवे की सुविधाएं हवाई यातायात की तरह उच्च तकनीक से लैस होने के साथ-साथ रेल यात्रियों को उपलब्ध सीटों की जानकारी मुहैया कराई जाए। वहीं क्रैक होती पुरानी पटरियों के बीच एक रिपोर्ट सामने यह भी आई है कि भारतीय रेल जिन पुलों से होकर गुजरती हैं उनमें से अधिकांश 100 वर्ष से भी पुराने हैं। अब इनका निर्माण आधुनिक तकनीक के मुताबिक होने चाहिए।

वर्तमान में भारतीय रेलवे, एशिया का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। इसे दुनिया के दूसरे सबसे बड़े नेटवर्क की भी ख्याति मिली है जिसे एक ही प्रबंधन के अधीन चलाया जा रहा है। हर दिन करीब 12,617 ट्रेनों पर 23 लाख यात्री सफर करते हैं।

भारतीय रेल ट्रैक की कुल लंबाई 64 हजार किलोमीटर से अधिक है। वहीं अगर यार्ड, साइडिंग्स वगैरह सब जोड़ दिए जाएं तो यही लंबाई 1 लाख 10 हजार किलोमीटर से भी ज्यादा हो जाती है। इतने बड़े नेटवर्क को अब आधुनिकता की ओर ले जाना बहुत बड़ी कवायत के तौर पर देखा जा रहा है। इसके नेटवर्क को हाइटेक किया जा रहा है।

सबसे पहले कब चली रेल
बता दें कि भारत में सबसे पहले मुंबई से ठाणे के बीच रेलगाड़ी चली। 16 अप्रैल, 1853 को इस 35 किलोमीटर के सफर का शुभारंभ किया गया था। भाप के इंजन के साथ 14 डिब्बों की रेलगाड़ी मुंबई से ठाणे के बीच रवाना हुई थी।

जनिए भारतीय रेल से जुड़ी कुछ रोचक बातें
16 अप्रैल, 1853 को पहली यात्री रेल मुबंई से ठाणे के बीच चली।
1890 में भारतीय रेलवे अधिनियम पारित किया गया।
1936 में यात्री डिब्बों को वातानुकूलित बनाया गया।
भारतीय रेलवे का राष्ट्रीयकरण वर्ष 1950 में हुआ था।
1952 में छह जोनों के साथ जोनल सिस्टम शुरू हुआ था। अब रेलवे के 17 जोन हैं।
रेलवे में करीब 13.1 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं।
भारतीय रेल दुनिया में सबसे लंबे और व्यस्त नेटवर्क में से एक मानी जाती है।
एक साल में 6 अरब से भी अधिक मुसाफिर रेल से यात्रा करते हैं।
कन्याकुमारी और जम्मू-तवी के बीच चलने वाली हिमसागर एक्सप्रेस सबसे लंबी दूरी की रेल है। इसका रूट 3745 किलोमीटर है।
1072 मीटर लंबा खड़गपुर रेलवे स्टेशन दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म है।


फेयरी क्वीन दुनिया में सबसे पुराना इंजन है, जो अभी भी दौड़ता है।
लाइफलाइन एक्सप्रेस एक विशेष रेल है। इसे हॉस्पिटल ऑन व्हील नाम से भी जाना जाता है। इस रेल में ऑपरेशन रूम से लेकर इलाज की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
1974 में हुई भारतीय रेलवे की हड़ताल अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल मानी जाती है। यह हड़ताल 20 दिन चली थी। 1974 के पश्चात रेलवे में कोई हड़ताल नहीं हुई।
1977 में धरोहर, पर्यटन, शिक्षा, मनोरंजन के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए राष्ट्रीय रेल संग्रहालय खोला गया।
सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल ट्रेवलर्स ने भारत की भव्य गाडियां डेक्कन ओडिसी, पैलेस ऑन व्हील्स और 100 साल पुरानी टॉय ट्रेन को विश्व की 25 सर्वश्रेष्ठ ट्रेनों की सूची में शामिल किया है।
2002 में जन शताब्दी ट्रेन की शुरूआत हुई।
2004 में इंटरनेट के माध्यम से आरक्षण प्रारंभ हुआ।
2007 में देशभर में टेलीफोन नम्बर 139 द्वारा व्यापक सामान्य ट्रेन पूछताछ सेवा प्रारंभ की गई।