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यूरोपियन यूनियन के सांसदों का कश्मीर दौरा भारत के लिए कितना फायदेमंद

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से लगातार वहां के हालात को लेकर उठते सवालों के बीच यूरोपीय यूनियन के कुछ सांसद जम्मू-कश्मीर का जायजा लेने के लिए श्रीनगर पहुंचे , जिसे लेकर हंगामा सियासी हंगामा खाड़ा हो गया।

हालांकि मोदी सरकार की ओर से इन सांसदों को जम्मू-कश्मीर का दौरा करने की अनुमति देने के इस फैसले को लेकर विपक्ष व कुछ अपने ही दलों के नेताओं ने आपत्ति दर्ज कराई। इधर सरकार की ओर से इसे एक सकारात्म कदम बताया गया। अब आइए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर यूरोपीय यूनियन के सांसदों के कश्मीर दौरे से भारत को क्या मिला और क्या नहीं?

मोदी सरकार ने किसे आमंत्रित किया

दरअसल, एक एनजीओ ने यूरोपीय यूनियन के सदस्य देशों के कुछ सांसदों को कश्मीर दौरे के लिए आमंत्रित किया। आमंत्रित सांसद आधिकारिक तौर पर यूरोपीय संघ के सांसद नहीं है, बल्कि वे सब अपने-अपने देश के पार्लियामेंट्रियन हैं।

इसमें यूके, फ्रांस, इटली, जर्मनी, पोलैंड, चेकेस्लोवाकिया आदि देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। सरकार ने कुल 27 सांसदों को आमंत्रित किया। इनमें से चार सांसद वापस लौट गए। यानी की कुल 23 सांसदों ने ही कश्मीर के हालात का जायजा लिया।

इन्हीं सांसदों को क्यों आमंत्रित किया गया

दरअसल, पाकिस्तान ने बीते दिनों कुछ अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों व बुद्धिजीवियों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) लेकर गया था और यह दिखाने की कोशिश की थी कि PoK में आतंकी शिविर होने के भारत का दावा गलत है।

इसके अलावा पाकिस्तान लगातार कश्मीर को लेकर दुनिया में एक झूठ और प्रोपैगैंडा फैलाया रहा है। पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगा रहा है कि भारत कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है और नरसंहार कर रहा है।

ऐसे में पाकिस्तान को काउंटर करने के लिए यह जरूरी था कि कुछ विदेशी बुद्धिजीवियों को कश्मीर के सामान्य हालात को दिखाया जाए, जिससे दुनिया में यह साफ संदेश जाए कि भारत किसी भी तरह से मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं कर रहा है।

लिहाजा यूरोपीय यूनियन के कुछ सासंदों को आमंत्रित किया गया। हालांकि इन सासंदों को भारत सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया बल्कि एक एनजीओ की ओर से इन्हें बुलाया गया। आमंत्रित सभी सांसदों में एक को छोड़कर बाकी सभी दक्षिणपंथी पार्टी के विचारधारा से संबंध रखते हैं।

यूरोपीयन यूनियन के ही सांसदों को क्यों

अब एक और महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि आखिर यूरोपीय यूनियन के ही सांसदों को क्यों बुलाया गया, बाकि देशों के सांसदों को क्यों नहीं? दरअसल, यूरोपीय यूनियन कई देशों का एक समूह है। यूरोपीय संसद के सदस्यों की कही ही बातें पूरी दुनिया में सही और साकारात्मक माना जाता है।

ऐसे में पाकिस्तान के झूठ और फरेब का जवाब देने के लिए ऐसे ही कुछ सकारात्मक जवाबों की जरूरत थी। बहरहाल, यह जरूर है कि ये सभी सांसद यूरोपीय पार्लियामेंट के सदस्य नहीं है, बल्कि यूरोपीय यूनियन के अपने-अपने देश के सांसद है। लिहाजा लोग इनकी विश्वसनीयता को लेकर सवाल तो जरूर खड़े करेंगे।