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स्टार फुटबॉलर और रिसर्च स्कॉलर से कैसे खूंखार आतंकी बन गया बगदादी

नई दिल्ली। अमरीकी सेना के एक ऑपरेशन में दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठनों में से एक ISIS का सरगना अबु बकर अल बगदादी मारा गया।

अमरीकी स्पेशल फोर्सेज ने सीरिया के इदलिब प्रांत स्थित बारिशा में एक ऑपरेशन चलाया जहां पर एक सुरंग में बगदादी छिपा था और अंततः अमरीकी सेना से खुद को घिरा देख बगदादी ने आत्मघाती धमाके में खुद को उड़ा लिया। इस धमाके में बगदादी के तीन बच्चे और दो बीबीयां भी मारी गई।

बगदादी के मारे जाने के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और लोग बगदादी के बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं। लोग यह जानना चाह रहे हैं कि एक फुटबॉलर और पीएचडी स्कॉलर कैसे दुनिया के लिए खूंखार आतंकी संगठन का सरगना बन गया।

शरिया कानून को मानता था बगदादी

अबु बकर अल बगदादी का जन्म इराक के सामरा में एक सुन्नी परिवार में 1971 में हुआ था। बगदादी का असली नाम इब्राहिम अल-ऊद अल-बदरी था।

बगदादी मानता था कि उसका परिवार पैगंबर मोहम्मद का वंशज है। लिहाजा वह हर तरह से इस्लामिक शरिया कानून को ज्यादा महत्व देता था। बगदादी को बचपन में ही कुरान की आयतें याद हो गई थी।

स्थानीय क्लब का स्टार फुटबॉलर था बगदादी

बता दें कि बगदादी खेलकूद में काफी माहिर था। हालांकि उसे फुटबॉल खेलना ज्यादा पसंद था। वह बगदाद के एक स्थानीय क्लब का स्टार फुटबॉलर भी था।

वह खेलने के साथ पढ़ाई में भी काफी तेज था। यूनिवर्सिटी ऑफ बगदाद से 1996 में इस्लामिक स्टडीज में स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री हासिल की। इसके बाद 1999 से 2007 के बीच में बगदादी ने कुरान पर इराक की सद्दाम यूनिवर्सिटी फॉर इस्लामिक स्टडीज से मास्टर और पीएचडी किया।

मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ किया काम

बगदादी सबसे पहले मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ जुड़ा और फिर हिंसक इस्लामिक मूवमेंट का हिस्सा बन गया। 2003 में जब अमरीका ने सद्दाम हुसैन को सत्ता से बेदखल करने के लिए इराक पर हमला किया, उस वक्त बगदादी ने जैश अह्ल अल-सुन्नाह वा अल-जमाह नाम के आतंकी गुट के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

अमरीका की ओर से लगातार हो रही कार्रवाई का नतीजा रहा कि फरवरी 2004 में इराक के फलुजा से बगदादी को गिरफ्तार कर लिया गया था।

बगदादी को बक्का स्थित नजरबंदी शिविर में 10 महीने तक कैद रखा गया। इस दौरान वह कैदियों को इस्लामी तालीम (शिक्षा) देता था। बगदादी के अच्छे व्यवहार को देखते हुए दिसंबर 2004 में रिहा कर दिया गया। रिहा होने के बाद हगदादी ने इराक में सक्रिय अल कायदा से बात की।

बगदादी के इस्लामिक ज्ञान से प्रभावित होकर अलकायदा ने उसे अपने साथ कर लिया और दमिश्क भेज दिया। इस बीच अबू अय्यूब अल मासरी ने इस्लामिक स्टेट इन इराक (ISI) नाम का एक संगठन बनाया। इसका संबंध अलकायदा से भी था।

2010 में बना ISIS का चीफ

बगदादी के इस्लामिक ज्ञान के कारण उसे शरिया समिति का पर्यवेक्षक बनाया गया। इसके बाद शूरा काउंसिल के 11 सदस्यों में भी शामिल किया गया। बाद में इराक में कमांडरों के बीच संवाद कायम करने के लिए बगदादी को आईएस की समन्वय समिति में भी शामिल किया गया।

जब अप्रैल 2010 में आईएस के संस्थापक मारा गया, तब शूरा काउंसिल ने बगदादी को आईएस का प्रमुख बना दिया। इससे पहले 2004 तक वह अपने परिवार के साथ ही रहता था और वह इराक में एक मस्जिद में मौलवी था। अमरीका ने हगदादी के जिन्दा या मुर्दा पकड़ने को लेकर 1 करोड़ डॉलर इनाम की घोषणा की थी।