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बाला रिव्यू: धमाकेदार कंटेंट के साथ फिल्म के किरदारों ने दर्शकों को खूब हंसाया

फिल्म ‘बाला’ समाज का आईना है। छोटे शहरों के युवा वर्ग के बीच अपनी पर्सनाल्टी को लेकर आए विचारों पर बनी यह फिल्म मील का पत्थर साबित हो सकती है

फिल्म: बाला
कलाकार:Ayushmann Khurrana, Yami Gautam, Bhumi Pednekar
निर्देशक:Amar Kaushik

फिल्म ‘बाला’ समाज का आईना है। छोटे शहरों के युवा वर्ग के बीच अपनी पर्सनाल्टी को लेकर आए विचारों पर बनी यह फिल्म मील का पत्थर साबित हो सकती है। हमारे समाज में लड़कियों का बॉडी शेमिंग का शिकार होना आम बात है। काले रंग या मोटे-पतले होने के कारण उन्हें जिंदगी भर तरह-तरह की बाते सुनने को मिलती हैं।

अमर कौशिक की ‘बाला’ लड़कों के गंजेपन की बात करती है। यह निर्देशक की चतुराई ही है कि वह एक तरफ गंजेपन की समस्या को डील करते हैं, तो दूसरी तरफ काली लड़की के प्रति समाज के संकीर्ण और हीन रवैये को बताना नहीं भूलते।यह समस्या हमारे समाज में घर गई है कि अगर आप शारीरिक रूप से बेहतर नहीं दिखते हो तो हर तरफ नकारे जाओगे। इस फिल्म में खास इसके डायलॉग हैं जो दिल में उतर जाते हैं। यह डायलॉग तंज जरूर हो सकते हैं, पर यह हमारे समाज का आईना हैं। दिलचस्प बात यह है कि अमर कौशिक समाज में सालों से चली आ रही इस प्रॉब्लम का सल्यूशन देते हुए यह कहना नहीं भूलते कि आप जैसे हो,वैसे खुद को स्वीकार करो। आपको बदलना क्यों है?

यह कहानी है बालमुकुंद उर्फ बाला (आयुष्मान खुराना) की है। बचपन इनके बाल घने और सिल्की थे और वह उन पर इतराया भी खूब करता था। मगर पच्चीस साल की उम्र तक आते-आते उसका घना और खिला चमन पूरी तरह से उजड़ गया। सिर से बाल तेजी झड़ने लगे। बढ़ते गंजेपन के कारण बाला की बचपन की गर्लफ्रेंड उसे छोड़ कर चली जाती है। समाज में उसका तरह-तरह से मजाक बनाया जाता है। नौकरी में डिमोशन मिलता है और एग्जिक्यूटिव के पद से फेयरनेस क्रीम बेचने का काम दिया जाता है। उसकी शादी नहीं हो पाती। बालों को सिर का ताज समझनेवाला बाला बालों को उगाने की जो सैकड़ों नुस्खे अपनाता है,वे भले हास्यास्पद या घिनौने हों,मगर बाला को यकीन है कि उसके बालों की बगिया एक दिन दोबारा गुलजार होगी।

हालांकि उसकी बचपन की स्कूल मेट लतिका (भूमि पेडनेकर) उसे बार-बार समझाने की कोशिश करती है। मगर वह लतिका से चिढ़ता है। पेशे से जानी-मानी दबंग वकील लतिका काले रंग के कारण समाज में नकारी जाती रही है। उधर बाल उगाने की हर तरकीब आजमा चुका बाला जब हेयर ट्रांसप्लांट के लिए खुद को तैयार करता है। बाद में उसे पता चलता है कि डायबिटीज के कारण उसे समस्या हो सकती है। हर तरह से हताश होने के बाद वह अपने पिता (सौरभ शुक्ला) द्वारा लाया हुआ विग पहनता है, तो उसका आत्मविश्वास लौटता है। उसी कॉन्फिडेंस के बल पर वह टिक टॉक स्टार परी (यामी गौतम) से अपने प्यार का इजहार करता है।

यह बात शादी की मंजिल तक पहुंचती है, मगर परी बाला के गंजेपन से अनजान है। क्या होता है जब उसे बाला के गंजेपन की सचाई का पता चलता है? क्या बाला खुद अपने गंजेपन को स्वीकार करेगा? यह जानने के लिए आपको फिल्म थिएटर में जाने की जरूर होगी। ये फिल्म आयुष्मान खुराना की है। उन्होंने इस फिल्म में बेमिसाल काम किया है, जिसकी तारीफ जितनी की जाए कम है। फिल्म के अन्य किरदारों में सौरभ शुक्ला से लेकर सीमा पाहवा, अभिषेक बनर्जी और जावेद जाफरी तक सभी का काम बेहतर है। इसके अलावा बाला के छोटे भाई बने धीरेन्द्र गौतम ने अच्छी कॉमेडी की है। साथ ही छोटे बाला बने सचिन चौधरी का काम भी बहुत बढ़िया हैं।